Karoly Takacs – दायाँ हाथ कटने के बाबजूद 2 बार ओलम्पिक विजेता

Karoly Takacs Motivational Story in Hindi

Karoly Takacs Motivational Story in Hindi (करोली टेकक्स की प्रेरक कहानी)

Karoly Takacs Motivational Story in Hindi यह कहानी है एक Karoly Takacs नामक आदमी की, जो अपने कंट्री का बेस्ट पिस्टल शूटर था। वह अपने देश का बहुत सारे मेडल जीत चुका था, और सब को यकीन था, कि 1940 में जो ओलंपिक होने वाले हैं उसमें Karoly ही जीतेगा।

Karoly का एक ही सपना था, कि अपने अपने हाथ को बेस्ट शूटिंग हैंड बनाना है। लेकिन उसके साथ एक हादसा हो गया, एक आर्मी कैंप में जिस हाथ को वो बेस्ट शूटिंग हैंड बनाना चाहता था। वो हाथ ग्रेनेट फटने से चला गया।

जो उसका सपना था, फोकस था, वह सपना टूट गया, अब उसके पास दो ही ऑप्शन था, या तो वह हार मान जाए या उसके पास जो है उसपर फोकस करे। अब वह अपना फोकस  उस हाथ पर लगा दिया जिससे वो लिख भी नहीं सकता था।

अब वो अपने बाएं हाथ पर फोकस करना स्टार्ट कर दिया अब वो डिसाइड कर चुका था की इस बाएं हाथ को वर्ल्ड का बेस्ट हैंड बनाना है।और वो दिन-रात लगाकर प्रेक्टिस करना स्टार्ट कर दिया।

अब वो वक्त आ गया, जब हंगरी में एक नेशनल चैंपियनशिप स्टार्ट होने वाला था। उसमें Karoly भी मुकाबला करने आया था। वहां एक से बढ़कर पिस्टल सूटर गए थे। वह सोच रहे थे, Karoly हमारा प्रोत्साहित करने आया है।

लेकिन ये किसी को पता नहीं था, की Karoly एक साल से अपने लेफ्ट हैंड से प्रैक्टिस कर रहा था। जब वो Karoly से मिलने के लिए गए तो Karoly ने बोला मै तुम्हारा प्रोत्साहन बढाने के लिए नहीं आया हु।

मै तुमसे लड़ने के लिए आया हु। तैयार हो जाओ। और Karoly ने इस मुकाबले को जीत कर सबको स्तब्ध कर दिया।

और वो यहाँ तक ही नहीं रुका, उसका फोकस पक्का था, की उसको अपने इस बाये हाथ को दुनिया का बेस्ट हैंड बनाना है। उसने अपना पूरा फोकस 1940 में होने वाले ओलम्पिक पर लगा दिया। लेकिन सेंकड वर्ल्ड वॉर की वजह से उस साल ओलिम्पिक नहीं हुआ।

लेकिन वो हिम्मत नहीं हरा, अब वो अपना पूरा धयान 1944 में होने वाले ओलिम्पिक पर फोकस किया, दुर्भाग्यवश 1944 में होने वाला ओलिम्पिक भी वर्ल्ड वॉर की वजह से दुबारा कैंसिल हो गया । अब वो अपना पूरा धयानं 1948 में होने वाले ओलिम्पिक पर फोकस किया।

अब Karoly 38 साल का हो गया था, अब Karoly का मुकाबला यंग लोगो से होने वाला था, जो केवल 28 -29 साल के थे। और उनसे मुकाबला करना इतना आसान नहीं था, लेकिन Karoly की डिस्टनेरी में मुश्किल शब्द था ही नहीं ,और 1948 में होने वाले ओलंपिक में Karoly अपने लेफ्ट हैंड के साथ मैदान में उतरा, और ओलंपिक में गोल्ड मैडल जीत कर इतिहास रच दिया।

Karoly यहाँ तक ही नहीं रुका , 4 साल बाद दुबारा ओलम्पिक हुआ, और दुबारा Karoly गोल्ड मैडल जीता। और लगातार 2 गोल्ड मैडल जीतकर उसने ओलम्पिक के इतिहास को बदल दिया, क्योकि इसके पहले किसी ने लगातार इस केटेगरी में गोल्ड मैडल नहीं जीता था।

वजह ढूढो किसी काम को करने की और जो भी है आपके पास उसपर फोकस करने की सफलता जरूर मिलेगी

Karoly Takacs Motivational Story in Hindi

Karoly Takacs Motivational Story in Hindi आपको आगे बढ़ने के लिए inspire करेगी ।

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Author: Avinash Singh

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